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बुधवार, 22 मार्च 2023

short motivational story in hindi - रोना क्यों

short motivational story in hindi - रोना क्यों short motivational story in hindi - रोना क्यों यह कहानी राबिया नाम की महिला की है उम्मीद है इससे आपको कुछ न   कुछ सिखने को जरूर मिलेगा स्टोरी को एन्ड तक जरूर पड़े                               .रोना क्यों

short motivational story in hindi

short motivational story in hindi - रोना क्यों

सूफी - संतो में राबिया का स्थान बहुत ऊँचा था | वे बड़ी सादगी का जीवन बिताती थी और सबको बेहद प्यार करती थी | इस्वर में उनकी अगाधा श्रद्धा थी | 

उन्होंने अपना सब कुछ उन्ही को सौंप रखा था | एक दिन एक व्यक्ति राबिया के पास आया | उसके सिर पर पट्टी बंधी थी | 

राबिया ने पूछा - क्यों भाई क्या बात है ? यह पट्टी क्यों बांध रखी है ? 

" वह आदमी बोला - " सिर में बड़ा दर्द है |"

 राबिया ने पूछा - "तुम्हारी कितनी उम्र है ?" 

 उत्तर मिला - "यही कोई तीस-एक साल की है |" 

 "अच्छा यह बताओ | " राबिया ने आगे सवाल किया - "इन तिस वर्षो में तुम तंदुरुस्त रहे या बीमार ?

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" उसने कहा - में हमेशा तंदुरुस्त रहा | कभी बीमार नहीं पड़ा |" 

 तब राबिया मुस्कुराकर बोली - "भले आदमी, तुम इतने साल तंदुरस्त रहे, पर तुमने एक दिन इसके शुकराने में पट्टी नहीं बांधी और अब जरा सिर में दर्द हो गया तो शिकायत की पट्टी बांध ली !" 

 राबिया की बात सुनकर वह आदमी बहुत शर्मिंदा हुआ और कुछ न बोल सका चुपचाप सिर झुकाकर चला गया | 

 राबिया की ये बात सुनने में तो मामूली लगती है, लेकिन इससे उनका मतलब था की सुख में तो हम भगवन को याद नहीं करते है और दुखो के आते ही भगवान के सामने अपने दुखो का रोना शुरू कर देते है


  

inspirational story in hindi - प्रेरणादायक हिंदी कहानी

सोमवार, 20 मार्च 2023

Short Motivational Story In Hindi-प्रेणादायक कहानी हिंदी में

Short Motivational Story In Hindi - प्रेणादायक कहानी हिंदी में...

प्रेणादायक कहानी हिंदी में जीवन की सिख लाल ( बहादुर शास्त्री के चरित्र की कहानी हिंदी में ) कभी भी खुद को बड़ा मत मानिये आपके बड़े होने का पता आपके चरित्र और आपके व्यवहार से पता लगता है यह कहानी एक महान पुरुष लाल बहादुर शास्त्री की है जो हकीकत में ही बहुत महान थे जिनको हम आज भी उनके महान व्यक्तित्व व कार्य के लिए जानते है | तो जानते है उनके बारे में। .. 

Short Motivational Story In Hindi

लाल बहादुर शास्त्री बड़े ही हसमुख स्वभाव के थे | लोग प्रायः ही उनसे हसमुख स्वभाव और निःस्वार्थ सेवा भावना के लिए प्रभावित हो जाया करते थे |

Short Motivational Story In Hindi-प्रेणादायक कहानी हिंदी मे

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 एक बार लाल बहादुर शास्त्री को लोक सेवा मंडल का सदस्य बनाया गया | लेकिन लाल बहादुर शास्त्री बहुत संकोची थे वे कभी नहीं चाहते थे की उनका नाम अखबारों में छपे और लोग उनकी प्रसंसा और स्वागत करे | एक बार लाल बहादुर शास्त्री जी के मित्र उनसे पूछा पूछा। " शास्त्री जी ! आप अखबारों में में नाम छपाने के लिए इतना परहेज क्यों करते है |

Short Motivational Story In Hindi-प्रेणादायक कहानी हिंदी में

शास्त्री जी मुस्कुराये और बोले, " लाला लाजपतराय जी ने मुझे लोग सेवा मंडल के कार्यभार सोपते हुए कहा था की, लाला बहादुर ताजमहल में दो तरह के पत्थर लगे है | एक बढ़िया संगमरमर के पत्थर लगे है| एक बढ़िया संगमरमर के पत्थर लगे है | जिन्हे दुनिया देखती है और प्रसंशा करती है | और दूसरे ताजमहल की नीव में लगे है जो दीखते नहीं और जिनके जीवन में अँधेरा ही अँधेरा है | लेकिन ताजमहल को वो ही खड़े किये हुए है |

Short Motivational Story In Hindi-प्रेणादायक कहानी हिंदी में

लालाजी के ये शब्द मुझे हमेशा याद रहते है | और में नीव का पत्थर बना रहता हु | इसलिए हमें भी जिंदगी में दिखावे से बचकर वो कार्य करना चाहिए जो असल में जरूरी है |

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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

short motivational story in Hindi - लगन का फल

 

short motivational story in Hindi उस बालक का मन विद्यालय मैं नहीं लगता था | विद्यालय मैं वह और छात्रों के द्वारा मंदबुद्धि कहलाता था | कक्षा मैं भी वह बालक सबसे पीछे रहता था, उसके अध्यापक भी उससे नाराज़ रहते थे | क्योकि उसकी बुद्धि का स्तर औसत से भी नीचे था | कक्षा मैं भी उसका पर्दशन हमेशा निराशाजनक ही होता था | अपने दोस्तों एवं सहपाठियो के बीच वह उपहास का विषय था | विद्यालय मै वह जब भी प्रवेश करता उस बालक पर चारों ओर से व्यंग और बाणो की बौछार सी होने लगती | इन सब बातो से परेशान हो कर, तंग आकर विद्यालय जाना ही छोड़ दिया |

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लगन का फल

 एक दिन वह बालक मार्ग पर यूँ ही चलता हुआ जा रहा था| चलते हुए उसे जोरो की प्यास लगी, वह इधर - उधर अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी तलाशने लगा | अंत मैं उसे एक कुआँ दिखाई दिया, वे वहाँ गया और अपनी प्यास बुझाई | वह चलता - चलता काफी थक गया था , इसलिए पानी पीने के बाद वही बैठ गया , तभी उसकी नज़र पत्थर पर पडे , उस निशान पर गयी. जिस पर बार - बार कुए के पानी खींचने के कारण रस्सी के निशान पड़ गए थे | वह मन ही मन सोचने लगा की जब बार - बार कुँए से पानी खींचने से पत्थर पर निशासन पड़ सकते है तो निरंतर अभ्यास से मुझे भी विद्या आ सकती है | 



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उसने अपने इस विचार को गांठ बांध लिया और पुनः विधालय जाना शुरु कर दिया | उसकी लगन देख कर अध्यापको ने भी उसका भरपूर सहयोग किया | उसने मन लगा कर कठिन परिश्रम किया | कुछ सालो बाद यही बालक महान विद्वान वरदराज के रूप मैं विख्यात हुए , जिन्होंने संस्कृत मैं मुग्धबोध और लघुसिद्धांत कौमुदी जैसे ग्रंथो की रचना की |

बुधवार, 8 फ़रवरी 2023

short motivational story in Hindi - गाँधारी का श्राप, श्रीकृष्ण का श्राप स्वीकारना

 

गाँधारी का श्राप, श्रीकृष्ण का श्राप स्वीकारना short motivational story in Hindi दुर्योधन के अंत के साथ ही महाभारत के महायुद्ध का भी अंत हो गया | माता गाँधारी दुर्योधन के शव के पास खडी फफक-फफक कर रो रही हैं| पुत्र वियोग मे गाँधारी का भगवान कृष्ण को श्राप देना , भगवान कृष्ण का श्राप को स्वीकार करना और गाँधारी का पश्चताप करना | इसका बडा ही मार्मिक वर्णन किया है धर्मवीर भारती जी ने ( गीता - कविता से संकलित ) गाँधारी : ह्रदय विदारक स्वर मैं short motivational story in Hindi - गाँधारी का श्राप, श्रीकृष्ण का श्राप स्वीकारना तो वह पड़ा है कंकाल मेरे पुत्र काकिया है यह सब कुछ कृष्ण तुमने किया है

 
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सब सुनो आज तुम भी सुनो मैं तपस्विनी गाँधारी अपने जीवन के सारे पुण्यों का बल ले कर कहती हूँ short motivational story in Hindi कृष्ण सुनो
 
तुम अगर चाहते तो रुक सकता था युद्ध यह मैंने प्रसव नहीं किया था कंकाल वह इंगित पर तुम्हारे ही भीम ने अधर्म किया क्यों नहीं तुमने ये शाप दिया भीम को जो तुमने दिया अश्वथामा कोजो तुमने दिया अश्वथामा को तुमने को तुमने किया है प्रभुता का दुरपयोग यदि मेरी सेवा मैं बल है संचित तप मैं धर्म है प्रभु हो या परात्पर हो कुछ भी हो सारा तुम्हारा वंश इसी तरह पागल कुत्तो की तरह एक दूसरे को परस्पर फाड खायेगा तुम खुद उनका विनाश कर के कई वर्षों बाद किसी घने जंगल मैं साधारण व्याध के हाथों मारे जाओगे प्रभु हो पर मारे जाओगे पशु की तरहवंशी

ध्वनि: कृष्ण की आवाज short motivational story in Hindi - गाँधारी का श्राप, श्रीकृष्ण का श्राप स्वीकारना कृष्ण ध्वनि : प्रभु हूँ या परात्पर पर पुत्र हूँ तुम्हारा तुम माता हो मैंने अर्जुन से कहा सारे तुम्हारे कर्मो का पाप पुण्य योगक्षेम मैं वहन करुँगा अपने कंधो पर अठारह दिनों के इस भीषण संग्राम मैं कोई नहीं केवल मैं ही मरा हूँ करोडो बार जितनी बार जो भी सैनिक भुमीशायी हुआ कोई नहीं था मैं ही था गिरता था जो घायल हो कर रणभूमि मैं अश्वत्थामा के अंगो से रक्त पीप स्वेद बन कर बहूँगा मैं ही युग युगांतर तक जीवन हूँ मैं तो मृत्यु भी मैं ही हूँ माँ श्राप यह तुम्हारा स्वीकार है

गांधारी : यह क्या किया तुमने फूट कर रोने लगती है कोई नहीं में अपने सौ पुत्रो के लिये लेकिन कृष्ण तुम पर मेरी ममता अगाध है कर देते श्राप मेरा तुम अस्वीकार तो क्या मुझे दुःख होता ? मै थी निराश मै कटु थी पुत्रहीन थी कृष्ण : ऐसा मत कहो माता जब तक में जीवित हूँ पुत्रहीन नहीं हो तुम प्रभु हो या परातपर पर पुत्र हूँ तुम्हारा तुम माता हो short motivational story in Hindi

real love story in hindi - पड़ोस वाला प्यार....

real love story in hindi - पड़ोस वाला प्यार.... में bsc करने वाला लड़का हु मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती है हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते...