inspirational story in hindi - प्रेरणादायक हिंदी कहानी ...
साँच को आंच नहीं किसी नगर में एक जुलहा रहता था | वह बहुत बढ़िया कम्बल तैयार करता था | कंतिनो से अच्छी उन खरीदता और भक्ति के गीत गाते हुए आनंद से कम्बल बुनता | वह सच्चा था, रत्तीभर भी कहीं खोट-कसर नहीं थी|
एक दिन उसने एक साहूकार को दो कम्बल दिय | साहूकार ने दो दिन बाद उनका पैसा ले जाने को कहा| साहूकार दिखाने को तो धर्म करम करता था, माथे पर तिलक लगाता था, लेकिन मन उसका मेला था
| वह अपना रोजगार छल-कपट से चलता था |
दो दिन बाद जब जुलाहा अपने पैसे लेने आया तो साहूकार ने कहा - "मेरे यंहा आग लग गयी और दोनों कम्बल जल गए अब में पैसे क्यों दू ? "
जुलाहा बोला - "यह नहीं हो सकता मेरे धंधा सचाई पर चलता है और सच में कभी आग नहीं लग सकती |
inspirational story in hindi - प्रेरणादायक हिंदी कहानी
जुलाहे के कंधे पर एक कम्बल पड़ा था उसे सामने करते हुए उसने कहा - "यह लो, लगाओ इसमे आग |" साहूकार बोला मेरे यहाँ कम्बलो के पास मिटटी का तेल रखा था | कम्बल ,उसमे भीग गए थे |
इस लिए जल गए | जुलाहे ने कहा - "तो इसे भी मिटटी के तेल में भिगो लो |" काफी लोग वंहा इकठे हो गए | सबके सामने कम्बल को मिटटी के तेल में भिगोकर आग लगा दी गयी | लोगो ने देखा की तेल जल गया, लेकिन कम्बल जैसा था वैसा बना रहा |
जुलाहा ने कहा - "याद रखो साच को आंच नहीं | read more-aakhiri padav - आखिरी पड़ाव
" साहूकार ने लज्जा से सिर झुका लिया और जुलाहे के पैसे चुका दिए | सच ही कहा गया है की
जिसके साथ सच होता है उसका साथ तो भगवन भी नहीं छोड़ता |


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