aakhiri padav - आखिरी पड़ाव... सुंदरबन इलाके में रहने वाले ग्रामीणों पर हर समय जंगली जानवरों का खतरा बना रहता था | खासतौर पर जो युवक घने जंगलो में लकड़ियों चुनने जाते थे उनपर कभी भी बाघ हमला कर सकते थे। | वही वजह थी की वे सब पेड़ो पर तेजी से चढ़ने-उतरने का प्रशिक्षण लिया करते थे प्रशिक्षण, गांव के ही एक बुजुर्ग दिया करते थे : जो अपने समय में इस कला के महारथी माने जाते थे. आदरपूर्वक सब उन्हे बाबा-बाबा कह कर पुकारा करते थे
इसी तरह बाकि के युवक भी पेड़ पर चढ़े और उतरे , और हर बार बाबा ने आधा उतर आने उतर आने के बाद ही उन्हे सावधान रहने को कहा।
यह बात युवको कुछ अजीब लगी। और उन्ही में से एक ने पूछा , " बाबा " हमें आपकी एक बात समझ नहीं आयी , पेड़ का सबसे कठिन हिस्सा तो एक दम उचा था जहा पे चढ़ना या उतरना एक डैम कठिन और मुश्किल था
आपने तब हमें सावधान होने के लिए नहीं कहा , लेकिन जब हम पेड़ का आधा हिस्सा उतर आये और बाकि हिस्सा उतरना बिलकुल आसान था तभी आपने हमें सावधान होने के निर्देश क्यों दिए ? '
बाबा गंभीर होते हुए बोले ,
" बेटे ! यह तो हम सब जानते है की ऊपर का हिस्सा सबसे कठिन होता है , इसलिए वह पर हम खुद ही सतर्क हो जाते है , और पूरी सावधानी बरकते है तो वह हमें बहुत ही सरल लगने लगता है। ...
हम जोश में होते है और अति आतम विश्वास से भर जाते है और इसी समय सबसे अधिक गलती होने की संभावना होती है यही कारन है की मैंने तुम लोगो को आधा पेड़ उतर आने के बाद सतर्क किया ताकि तुम अपनी मंजिल के निकट पहुंचने के बाद कोई गलती न कर बैठो | ..
युवक बाबा की बात समझ गए , आज उन्हे एक बहुत बड़ी सिख मिल चुकी थी |
मित्रो, सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारित होना जरूरी है ,
और ये भी जरूरी है की जब हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुंच जाये , मंजिल को सामने पाए तो कोई जल्दबाजी न करे और पुरे धैर्य के साथ अपना कदम आगे बढ़ाये। बहुत से लोग लक्ष्य के निकट पहुंच कर अपना धैर्य खो देते है और गलतिया कर बैठते है जिस कारन वो अपने लक्ष्य से चूक जाते है।
इसलिए लक्ष्य के आखिरी पड़ाव पर पहुंच कर भी किसी तरह की अशावधानी मत बरतिए और अपने लक्ष्य प्राप्त कर के ही दम लीजिये।

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