motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक

motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक ये कहानियाँ आपको सफल बना सकती है Best Motivational Story Hindi

motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक

motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक उबलता पानी और मेंढक वैज्ञानिको ने शारीरिक बदलाव की समता की जाँच करने के लिए शोध किया शोध में एक मेंढक लिया गया उसे एक कांच के जार में डाल दिया गया फिर जार में पानी डालकर उसे गरम किया गया था, तांकि जब पानी का तापमान मेंढक की सहनशीलता से बाहर हो जाए, तो वह कूदकर बाहर आ सके |

 प्रारम्भ में मेंढक शांति से बैठा रहा. जैसे पानी का तापमान बढ़ाना प्रारम्भ हुआ, मेंढक में कुछ हलचल सी हुई. उसे समझ तो आगया की वह जिस पानी में बैठा है. लेकिन कूदकर बाहर निकलने के स्थान पर वो अपनी शरीर की ऊर्जा बढे हुए तापमान में तालमेल बैठाने में लगा |

 पानी थोड़ा और गर्म हुआ, मेंढक को पहले से ज्यादा बेचैनी होने लगी लेकिन वह बेचैनी उसकी सेहेनशीलता के भीतर ही थी. इसलिए वह पानी बाहर नहीं कूदा, बल्कि अपनी शरीर की ऊर्जा में तालमेल बैठाने में लगा. धीरे-धीरे पानी और गर्म होता गया तो मेंढक की अधिक ऊर्जा पानी के बढ़ते हुए तापमान से तालमेल बैठाने में लगता रहा. जब पानी उबलने लगा,

 तो मेंढक की जान पर बन आई. अब उसकी सहन शक्ति जवाब दे चुकी थी, उसने जार से बाहर कूदने के लिए अपनी शक्ति बटोरी, लेकिन वह पहले ही शरीर की समस्त ऊर्जा धीरे-धीरे उबलते हुए पानी से उसके जार से बाहर कूदने की ऊर्जा शेष नहीं थी, वह जार से बहार कूदने में नाकाम रहा और उसी जार में मर गया. 

 motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक


motivational story in hindi - उबलता पानी और मेंढक

read more Short Motivational Story In Hindi-प्रेणादायक कहानी हिंदी में 

यदि समय रहते उसने अपनी ऊर्जा का प्रयोग जार से बहार निकलने के लिए किया होता, तो वह जीवित होता | सिख \ दोस्तों हमारे जीवन में भी ऐसा होता है. अक्सर परिश्थितियां विपरीत होने पर हम उसे सुधारने या उससे बहार निकलने का प्रयास ना कर उससे तालमेल बैठाने में लग जाते है. हमारी आँखे तब खुलती है जब परिश्थितियां बेकाबू हो जाती है | 

और हम पछताते रह जाते है की समय रहते हमने कोई प्रयास क्यों नहीं किया इसलिए प्रारम्भिक अनुभव होते ही परिस्थितिया सुधारने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दे और जब समझ आ जाये की इनको संभालना मुश्किल है, तो उससे निकल जाये। परिश्थितियों से लड़ना आवश्यक है लेकिन समय रहते उससे बाहर निकलना बुद्धिमानी का काम है |

real love story in hindi - पड़ोस वाला प्यार....

real love story in hindi - पड़ोस वाला प्यार.... में bsc करने वाला लड़का हु मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती है हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते...