Emotional love Story in Hindi -सच्ची प्रेम कहानी हिंदी में Love Story in Hindi सच्ची दिल को छूने वाली प्रेम कहानी हिंदी में
दोस्तों यह कहानी एक सारिका नाम की लड़की और सौरभ नाम के लड़के की है जोकि एक सच्ची कहानी है आशा करती हु आपको जरूर पसंद आएगी इसी कहानी को लास्ट तक जरूर पढ़े
ऑफिस के काम से थकी हरी विजया जब घर आती तो उसको लगता है की थकान के मरे उसके सरीर के सरे कल पुर्जे ढीले हो गए हो डिनर बनाने तक उसको नहीं हो पा रहा था थकी हारी वजिया चाय बनाने लगी उसी से काम चलाने लगी |
वह लेपटॉप खोलती है अचानक ही फेसबुक पे एक मेसेज आता है |
"हाय "
यह किसी सौरभ का मेसेज था
"हैलो हाउ आर यू ?"
में ठीक हु और आप ? "
जी में ठीक हु "
फिर विजया ने पूछा आपकी पोस्ट पढ़ कर अच्छा लगा | आप काफी अच्छे लिखते है लेखक है क्या आप
थैंक यू मेम मेरी पोस्ट को पढ़ने के लिए, में शौकिया तोर पर एक लेखक हु प्राइवेट स्कूल के शिक्षक हु
|
इस तरिके से उनकी जान पहचान फेसबुक पे हुई और ऐसे ही बातो का सिलसिला आरम्भ हुआ
परन्तु रोज ऑफिस से आकर एक बार फेसबुक में झाकना विजया की आदत होगयी | उसको महसूस होने लगा की उसको सौरभ करना भा रहा है उसको सौरभ की बाते अच्छी लगनी लगी सौरभ जब भी उससे बात करता बड़े अदम्ब करता था उससे कुछ भी फालतू नहीं बोलता था तथा आवश्यकता पढ़ने पर वह उसे नेक सलाह भी देता था | उससे बात करके मनो विजया का दिन भर का थकान मिट जाता था | दोनों देर रात भर चैटिंग करते थे
Emotional love Story in Hindi -सच्ची प्रेम कहानी हिंदी में
दो हफ्ते बाद " दोनों ने एक दूसरे से उनकी होब्बी के बारे में बात की दोनों में बहुत सी बात हुई
आज विजया का फिरसे डिनर बनाने का मन नहीं हो रहा था | वो बहत थकी हुई थी
सौरभ ने बहुत मिन्नत ककरे उसको किचन में पंहुचा दिया |
उनको बात करते करते दो महीने बीत जाते है
| सौरभ विजया से कहता है अगले हफ्ते में तुम्हारे सेहर आ रहा हु क्या तुम मुझसे मिलने आओगी | विजया खुश होकर उसको हां कर देती है लेकिन फिर सेहम जाती है( क्युकी उसके पास्ट में ऐसा था जो उसको बहुत तकलीफ देता था |)और बोलती है मेरे ऑफिस में दो तीन दिन कॉन्फ्रेंस है में नहीं आ पाऊँगी सॉरी
कोई बात नहीं , सौरभ कहता है
ऐसे ही बात करते है वो दोनों दो साल बीत जाते है सौरभ जब भी उससे मिलने को कहता वह मना कर देती थी सौरभ ने कहा मुझे लगता हे तुम बहुत सुन्दर हो अंदर से भी और बाहर से भी विजया कुछ नहीं कहती है |
सौरभ सोचता है जरूर विजया के साथ उसके पास्ट में कुछ हुआ है जोकि उसको ऐसा करने से ,मना कर रहा है वह पता करने की कोसिस करता है और एक दिन न्यूज़ पप्पेर वाला बनके विजया के घर जाता है सूबा के टाइम विजय दरवाजा खोलती है सौरभ बोलता है हेलो सारिका ( उसको विजया का असली नाम पता चल चूका था ) में सौरभ 'तुम्हारे फेसबुक का फ्रेंड सॉरी बिना बताये आ गया सारिका का मुँह ढका हुआ था वह अंदर गयी |
खुद को सँभालते हुए वह सच का सामना करने को तैयार थी वह अपने मुँह को खोल कर सौरभ के सामने आयी थोड़ी देर रुकने के बाद सौरभ ने खुद को संभल लिया क्युकी वह लेखक था लेखक बहुत संवेदन सील होते है वह सरीना से पूछता है तो सारिका उसको सब बताती है की की। .
रस्ते में जाते वक़्त किसी लड़के ने उसपे तेजाब डाल दिया था उसको सबने अपनाने से इंकार कर दिया वह बहुत टाइम से अकेली रहती है अपना मुँह और नाम छुपा के सौरभ के आखो में आशु की बुँदे होती है
वह सारिका से बोलता है मुझे पता है आप ने बहुत कुछ सहा है और वह उसको हिम्मत दिलाने के लिए अपने पाव से अपनी पेंट को उप्पर करता है सारिका देखती है उसकी दोनों टांगे नकली है |
सारिका बहुत रो पढ़ती है दोनों एक दूसरे को जोर से गले लगते है सौरभ सारिका से कहता है की इस समय जैसा तुम महसूस कर रहे हो शामे ऐसा ही हाल मेरा भी हुआ है | में न कहता था आप वाकई बहुत खूसूरत है अंदर से भी और बाहर से भी | अगर आपको में पसनद हु तो आजीवन में आपका साथ और आपके ये दो हाथ मांगता हु |
थोड़ी देर बाद सौरभ बोलै -
"" सारिका ' आप तो बड़ी आलसी निकली !! घर आये मेहमान को आपने अभी तक पानी भी नहीं पूछा | बड़ी चीफ बानी फिरती है !""
इतना सुनने के बाद सारिका से बिलकुल बैठा न गया और अभी लेके आती हु बोलने के बाद वह किचन में भगति हुयी गयी ..
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