एकता का बल एक किसान था | उसके पांच बेटे थे | सभी बलवान और मेहनती थे | पर वे आपस में हमेसा लड़ते झगड़ते रहते थे | किसान यह सब देख कर बहुत चिंतित रहा करता था वह चाहता था की उसके बेटे आपस में लड़ाई झगड़ा न करे और मेलजोल से रहे | किसान ने अपने बेटो को बहुत समझाया और डाटा फटकारा भी, पर उनपर इसका कोई असर नहीं हुआ |
किसान को हमेशा यही चिंता सताती रहती थी की वह अपने बेटो में एकता कैसे कायम करे ! एक दिन उसे अपनी समस्या का सुझा | उसने अपने पांचो बेटो को बुलाया उनको एक लकड़ी का गठर दिखा कर उसने पूछा, '' क्या तुम में से कोई एक गठर को खोले बिना तोड़ सकता है |
Ekta Mein Bal Ki Kahani - एकता में बल की कहानी
किसान के पांचो बेटे बरी बरी से सामने आये उन्होंने खूब ताकत लगाई लेकिन कोई भी उस गठर को तोड़ नहीं सका | फिर किसान ने लकड़ियों के गठर को खोलकर अलग अलग कर दिए उसने अपने बेटो को एक एक लड़की देकर उसे तोडने के लिए कहा सभी लड़को ने आसानी से एक एक करके वो लकडिया तोड़ दी |
किसान से कहा, '' देखो ! एक-एक लकड़ी तो तोडना कितना आसान है इन्ही लकड़ियों को एक गठर में बांध देने पर ये कितनी मजबूत हो जाती है | इसी तरह तुम लोग मिल जल कर एक साथ रहोगे, तो मजबूत बनोगे और लड़ झगड़ कर अलग-अलग हो जाओगे, तो कमजोर बनोंगे |''



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